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अर्जेंटीना में मंकीपॉक्स के 2 नए मामले आए सामने, स्पेन से लौटे थे संक्रमित, संपर्क में आए लोगों की हो रही है जांच

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अर्जेंटीना में शुक्रवार को मंकीपॉक्स के दो मामले सामने आए. दोनों मामले हाल ही में स्पेन से अर्जेंटीना पहुंचे दो पुरुषों में दर्ज किए गए, जिससे लातिन अमेरिका में पहली बार इस संक्रमण की मौजूदगी की पुष्टि हुई. अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ब्यूनस आयर्स के एक व्यक्ति के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने की बात कही थी. यह व्यक्ति हाल ही में स्पेन से लौटा था. मंत्रालय ने बाद में एक बयान जारी कर बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में अर्जेंटीना आए स्पेन के एक नागरिक में भी मंकी पॉक्स संक्रमण की पुष्टि हुई है. अधिकारियों ने संक्रमितों के बारे में कोई अन्य जानकारी नहीं दी है. उन्होंने कहा, ‘दोनों की हालत स्थिर है. उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है और उनका उपचार जारी है.’

मंत्रालय के मुताबिक, स्पेन से लौटे दोनों मरीजों के संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है और अभी तक किसी में संक्रमण के लक्षण सामने नहीं आए हैं. मंकीपॉक्स भी एक दुर्लभ बीमारी है जो स्मॉल पॉक्स (Smallpox) या छोटीमाता की तरह ही होती है. इसमें भी फ्लू जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. बीमारी गंभीर हो जाने पर निमोनिया के बाद जानलेवा सेप्सिस के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं. इसके बाद लिंफ नोड्स में में सूजन आने लगती है फिर चेहरे और बॉडी पर दाने-दाने की तरह लाल रेशेज आने लगते हैं. लिनोक्स हिल हॉस्पिटल न्यूयॉर्क के डॉक्टर रॉबर्ट ग्लैटर ने बताया कि मंकीपॉक्स के लिए उसी कुल का वायरस जिम्मेदार है जिस कुल का वायरस स्मॉलपॉक्स के लिए जिम्मेदार है.

मंकीपॉक्स को लेकर भारत सरकार की तरफ से जो निर्दश दिए गए हैं उसमें बताया गया है कि मकीपॉक्स एक वायरल जेनेटिक बीमारी है. जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन क्षेत्रों में होती है. कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में भी रोग का प्रसार हुआ है. मकीपॉक्स के मरीजों में बुखार, चकत्ते और सूजी हुई लिम्फनोइस जैसे लक्षण पाए जाते हैं. जिनके कारण अनेक प्रकार की चिकित्सीय जटिलताएं भी हो सकती हैं. इसके लक्षण दो से चार सप्ताह तक प्रदर्शित होते हैं. लेकिन कुछ रोगी गंभीर रूप से भी बीमार हो सकते हैं. इस बीमारी में मृत्युदर 1-10 प्रतिशत तक हो सकती है. मकीपॉक्स जानवरों से मानवों में या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. यह वायरस कटी-फटी त्वचा (भले ही दिखाई न दे), सांस या म्यूकोसा (आंख, नाक या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है.