अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के तमाम देशों के खिलाफ टैरिफ वॉर छेड़ रखा है. ट्रंप सरकार अमेरिकी प्रोडक्ट पर लगने वाले टैक्स को कम करने का दबाव लगातार डाल रहे हैं. साथ ही अमेरिकी उत्पादों के आयात को बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं. कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने भारत के प्रोडक्ट पर 25 फीसद तक अतिरक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. इन सब घटनाक्रमों के बीच अब एक बड़ी खबर सामने आई है. भारत ने अमेरिका से एनर्जी इंपोर्ट को काफी बढ़ा दिया है. इस कदम को दोनों देशों के बीच ट्रेड बैलेंस की स्थिति बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
कच्चे तेल के आयात में भारी वृद्धि
भविष्य की मांग और रणनीतिक साझेदारी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक भारत वैश्विक तेल मांग वृद्धि का सबसे बड़ा ड्राइवर बन जाएगा और एलएनजी की मांग 78% बढ़कर 64 अरब घन मीटर सालाना हो जाएगी. ऐसे में भारत की अमेरिकी ऊर्जा की ओर बढ़ती निर्भरता रणनीतिक दृष्टि से अहम है. सूत्रों के अनुसार, ‘लंबी अवधि के एलएनजी और कच्चे तेल अनुबंधों को लेकर भारतीय और अमेरिकी कंपनियों के बीच अरबों डॉलर के समझौते पर चर्चा चल रही है. भारत अमेरिका को अपनी ऊर्जा सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद साझेदार मानता है.’



