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वेलकम डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड छेरकाबांधा कोटा विधानसभा के आसपास की भयानक दुर्दशा, आसपास की जमीन होती जा रही बंजर। काम करने वाले मजदूरों, ग्रामीणों की सुरक्षा भगवान भरोसे।

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वेलकम डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड छेरकाबांधा लारीपारा से निकलने वाला खराब काला पानी गांव के खेतों को बंजर बना रहा है। खेत की फसल एसिड के कारण जल रही है किसानों ने बताया उस खराब दुषित पानी को पीकर पशु, पक्षी, जानवर की हर साल मौत हो रही है पर्यावरण की दृष्टि से इस प्लांट को शहर से कम से कम 25 किलोमीटर दूरी पर होना था फैक्ट्री को संचालन करने के लिए लगभग ढाई सौ एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है और आसपास के किसानों की एनओसी की भी जरूरत पड़ती है जबकि ऐसा नहीं हुआ है अभी वर्तमान में वेलकम के पास 56 एकड़ जमीन लगभग है और यहां पर फैक्ट्री का कंपोस्ट खाद
जहां बनाया जा रहा वहां पर 9 एकड़ के आसपास जमीन है बाकी फैक्ट्री प्रबंधन में वन विभाग की जमीन में बेजा कब्जा कर लिया है वन विभाग के द्वारा कलमीटार के कक्ष क्रमांक 1582 एवं 1587 में निर्मित तालाब को टायर बांध बना दिया गया जिसका उपयोग वेलकम डिस्टलरी के द्वारा प्रदूषित काला पानी छोड़ा जा रहा है जिस कारण वन विभाग के बांध में काला पानी ही नजर आता है जिसके चलते आसपास के 25 किलोमीटर तक के गांव प्रवाहित हो रहे हैं इस फैक्ट्री की लापरवाही से पहले भी कई लोगों की मौत हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार अगस्त 2010 में विजय कुमार बिहार का रहने वाला की फैक्ट्री में मौत हो गई थी इसी फैक्ट्री के काले पानी डैम में डुबने से 10 दिसंबर 2010 में नरसिंह यादव से मौत हो गई थी वही 25/12/13 की घटना फैक्ट्री के अंदर बॉयलर के गर्म पानी में जलने के कारण पुन्नी दास मानिकपुरी 42 वर्ष ग्राम खुरदुर की मौत हो गई थी जिसे आनन फानन में फैक्ट्री के प्रबंधन के द्वारा उसे दफना दिया गया था। शिकायत किए जाने पर अनुविभागी अधिकारी राजस्व पुलिस विभाग को बाद में पता चलने पर प्रशासन के द्वारा पुनः डेड बॉडी को एसडीएम तहसीलदार थानेदार के सामने निकलने के बाद पोस्टमार्टम के बाद कोटा पुलिस ने वेलकम प्रबंधन के ऊपर 304 ए 201, 34 का अपराध पंजीकृत कर वेलकम डिस्टलरी फैक्ट्री के मालिक, मैनेजर के ऊपर अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया गया जो मामला न्यायालय में लंबित है वही 25 अगस्त 2014 को वेलकम फैक्ट्री के अंदर अर्जुन केवट 35 वर्ष खुरदुर निवासी की मौत फैक्ट्री के अंदर अचानक से हो गई थी जिसकी लाश में उसके मुंह में खून के दाग चेहरा फूला हुआ लग रहा था। वेलकम डिस्टलरी फैक्ट्री के अंदर कम कर रहे गरीब मजदूरों की कोई भी सुरक्षा नहीं है ना ही सक्षम डॉक्टर है ताकि त्वरित इलाज हो सके और अंदर बॉयलर में काम करने वाले मजदूर हेलमेट भी नहीं लगाते हैं मजदूरों की सुरक्षा भगवान भरोसे है फिर भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहा है। इसी तरह 8 दिसंबर 2010 में भी फैक्ट्री के द्वारा फर्जी होलोग्राम लगाकर फर्जी तरीके से शराब की निकासी की गई थी। और अभी वर्तमान में भी 26 पेटी शराब जो पकड़ी थी वह भी वेलकम प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री की थी जिसे आज तक कोई लेने नहीं आया सवाल यह उठता है कि शराब फैक्ट्री से शराब कैसे निकली जबकि आबकारी विभाग का भी वहां पर कार्यालय उपलब्ध है अधिकारीयों कर्मचारियों के लिए रहते हैं।