दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के किसी सदस्य की मदद के लिए लोन का गारंटर बनना आसान फैसला लग सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर वह आदमी लोन नहीं चुका पाया, तो EMI का बोझ आपके कंधों पर भी आ सकता है? इतना ही नहीं, आपके क्रेडिट स्कोर, बचत और यहां तक कि संपत्ति पर भी खतरा मंडरा सकता है. गारंटर बनने से पहले इन 5 बड़े खतरों को समझना बेहद जरूरी है, वरना एक अच्छी नीयत आपको बड़ी आर्थिक परेशानी में डाल सकती है.
बता दें कि लोन गारंटर वह आदमी होता है जो कानूनन यह जिम्मेदारी लेता है कि अगर लोन लेने वाला मुख्य बॉरोअर पैसा नहीं चुका पाएगा, तो उसकी जगह मैं पूरा लोन चुकाऊंगा. बैंक अक्सर गारंटर तब मांगते हैं जब लोन लेने वाले का क्रेडिट स्कोर खराब हो या उसकी कमाई पर बैंक को पूरा भरोसा न हो.
क्रेडिट स्कोर की धज्जियां उड़ना: अगर मुख्य बॉरोअर ईएमआई चुकाने में देरी करता है या डिफॉल्ट करता है, तो इसका सीधा बुरा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ेगा.
पूरा कर्ज चुकाने की कानूनी जिम्मेदारी: अगर लोन लेने वाला हाथ खड़े कर दे या भाग जाए, तो बैंक कानूनी रूप से आपसे पाई-पाई वसूलेगा. आपको पूरा लोन अपनी जेब से भरना पड़ सकता है.
प्रॉपर्टी और बैंक बैलेंस का खतरा: लोन एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक, लोन न चुकाए जाने की स्थिति में बैंक गारंटर की संपत्ति, जमीन या पर्सनल सेविंग्स को बेचकर भी अपना पैसा वसूल कर सकता है.
आपको खुद लोन मिलने में दिक्कत: चूंकि आप पहले ही किसी के लोन की जिम्मेदारी ले चुके हैं, इसलिए बैंक आपकी लोन लेने की क्षमता को कम मानता है. भविष्य में जब आपको खुद के लिए या बच्चों के लिए लोन चाहिए होगा, तो बैंक आपको मना कर सकता है.
रिश्तों में कड़वाहट और अदालती चक्कर: पैसों का विवाद अच्छे से अच्छे रिश्ते को खत्म कर देता है. लोन डिफॉल्ट होने पर न सिर्फ दोस्ती या रिश्तेदारी टूटेगी, बल्कि बात कोर्ट-कचहरी और मानसिक तनाव तक पहुंच सकती है.



