*साक्षरता रैली, टॉर्च एवं मशाल रैली, उल्लास शपथ, सेल्फी प्वाइंट और शिक्षार्थियों के अनुभव रहे आकर्षण का केंद्र*
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण रायपुर के मार्गदर्शन में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं ग्रामों में उल्लास महा चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आजादी के पर्व को साक्षरता के उल्लास से जोड़ते हुए जन-जन को शिक्षा और साक्षरता के प्रति जागरूक किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी ने बताया कि उल्लास का मूल मंत्र ‘जन-जन साक्षर और कर्तव्य बोध’ है। कार्यक्रम का उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे वयस्कों को सशक्त बनाना है, जो किसी कारणवश स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके हैं। साक्षरता के साथ उन्हें जीवनोपयोगी ज्ञान, डिजिटल साक्षरता और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना भी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त को ग्राम प्रभारी एवं शिक्षकों के नेतृत्व में समुदाय के युवक-युवतियों, महिलाओं, पुरुषों एवं बुजुर्गों की सहभागिता से उल्लास साक्षरता रैली, मोबाइल टॉर्च रैली एवं उल्लास मशाल रैली निकाली गई। रैलियों के माध्यम से ग्रामीणों को साक्षरता के महत्व से अवगत कराया गया तथा नवसाक्षरों को 15 अगस्त को आयोजित महा चौपाल में सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया। 15 अगस्त को ध्वजारोहण के पश्चात प्रभात फेरी एवं साक्षरता जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान सामूहिक रूप से उल्लास शपथ ली गई। नवसाक्षर शिक्षार्थियों ने अपने अनुभव एवं सीखने की यात्रा साझा करते हुए बताया कि साक्षरता ने उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन में किस प्रकार सकारात्मक बदलाव लाया है। कार्यक्रम में ‘मातृ साक्षरता’ तथा ‘अंगूठे से कलम तक सम्मान’ के तहत शिक्षार्थियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए। डिजिटल साक्षरता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। वहीं सेल्फी प्वाइंट, साक्षरता रंगोली, नुक्कड़ नाटक और ‘उल्लास की घंटी’ जैसी गतिविधियों ने कार्यक्रम को रोचक एवं आकर्षक बनाया। महा चौपाल में नवसाक्षर शिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में शिक्षकों, ग्रामवासियों, स्वयंसेवकों एवं शिक्षार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।



