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DMF के 32.97 लाख के काम की खुली पोल! अधूरी नालियां, अस्पताल परिसर में जलभराव

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ज़िला – गौरेला पेंड्रा मरवाही

जिला चिकित्सालय परिसर में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृत 32.97 लाख रुपये के ड्रेनेज, सीवरेज और टॉयलेट उन्नयन कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दर्शाए जाने के बावजूद मौके पर नालियां अधूरी हैं और कई स्थानों पर उन्हें आपस में जोड़ा तक नहीं गया है। इसके कारण अस्पताल परिसर में बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। कई हिस्सों में जलभराव और गंदगी की स्थिति बनी हुई है। मामले में निर्माण एजेंसी तथा कार्य के मूल्यांकन और सत्यापन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में आ गई है।
कार्यस्थल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिला अस्पताल परिसर में ड्रेनेज एवं सीवरेज कार्य तथा टॉयलेट उन्नयन के लिए DMF मद से 32.97 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। क्रियान्वयन एजेंसी ग्राम पंचायत सेमरा के सरपंच एवं सचिव को बनाया गया था। दस्तावेजों में कार्य अवधि 20 मई 2025 से 20 अगस्त 2025 तक दर्ज है। वहीं अंतिम मूल्यांकन राशि 29,95,451 रुपये दर्शाई गई है।
दस्तावेजों में पूर्ण, मौके पर अधूरा
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्य दस्तावेजों में पूर्ण है तो अस्पताल परिसर में आज भी नालियां अधूरी क्यों हैं। नालियों का आपस में जुड़ाव नहीं होने से पानी की निकासी प्रभावित है। परिजन कक्ष के आसपास भी गंदगी और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दस्तावेजों में ग्राम पंचायत सेमरा के सरपंच तुफान सिंह धुर्वे, सचिव किशन राठौर, आरईएस एसडीओ श्याम दास मोहले और सब इंजीनियर अस्मिता बंजारे सहित संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। ऐसे में सवाल है कि अधूरे कार्य का निरीक्षण और मूल्यांकन किस आधार पर किया गया तथा कार्य को पूर्ण प्रमाणित करने में किन अधिकारियों की भूमिका रही।
वही दस्तावेजों में 2,89,993 रुपये के विद्युतीकरण कार्य का भी उल्लेख है। इसे पूर्ण बताते हुए गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। फाइल में ‘शिवम कंस्ट्रक्शन’ द्वारा लगाई गई विद्युत सामग्री की हस्तलिखित सूची और तस्वीरें भी संलग्न बताई गई हैं। इसकी भी तकनीकी जांच जरूरी है।।।
जिला अस्पताल के अधिकारी भी मानते है कि नाली का निर्माण कराया गया था, लेकिन कार्य आज भी अधूरा है। परिसर में गंदगी की स्थिति बनी हुई है। यह स्थिति दस्तावेजों में दर्शाई गई पूर्णता और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को स्पष्ट करती है।

वही मामले में कलेक्टर विजय दयाराम के. ने इसे गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। शिकायत मिलने के बाद ईई आरईएस से जांच कराई गई। जांच के बाद ग्राम पंचायत सेमरा के सचिव किशन राठौर, सरपंच तूफान सिंह धुर्वे, आरईएस एसडीओ श्याम दास मोहले और सब इंजीनियर अस्मिता बंजारे को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने कहा कि संबंधितों से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
DMF की राशि जनहित के कार्यों के लिए होती है। ऐसे में अधूरे निर्माण को पूर्ण दर्शाए जाने की स्थिति में तकनीकी और वित्तीय जांच जरूरी है। जांच से स्पष्ट होगा कि स्वीकृत राशि के मुकाबले वास्तविक कार्य कितना हुआ, भुगतान कितना किया गया और अधूरे कार्य को पूर्ण प्रमाणित करने के लिए कौन जिम्मेदार है।