ईयू के इस रेगुलेशन के तहत 1.83 करोड़ टन का शुल्क-मुक्त कोटा निर्धारित किया गया है. कोटे से अधिक आयात पर 50 फीसदी शुल्क लगाया जाएगा. साथ ही इस्पात के उत्पादन में अयस्क को पिघलाने और ढलाई की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘मेल्ट एंड पोर’ व्यवस्था लागू की गई है. इस व्यवस्था का उपयोग खासकर इस्पात व्यापार में होता है, जहां यह निर्धारित करता है कि इस्पात किस देश में पिघलाया और ढाला गया है.
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि रेगुलेशन एक जुलाई से लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों ने कोटे का लाभ उठाना शुरू कर दिया है और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ को स्टील भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस्पात क्षेत्र के लिए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लाभ पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं. कोटे के तहत होने वाले निर्यात पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा. वहीं, उपलब्ध कोटे से अधिक निर्यात किए जाने पर 50 फीसदी शुल्क देना होगा.



