पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी पवन सिंह गुज्जर है. उसने महेश जांजवडिया से यह जगह 12 हजार रुपये महीने के किराये पर लिया था. महेश वहां सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता था. आरोप है कि उसने परिसर के मालिक को जानकारी दिए बिना ही जगह पवन सिंह को किराये पर दे दी. इसके बाद पवन सिंह ने एलपीजी सिलेंडरों में गैस भरने के लिए दूसरे लोगों को काम पर रख लिया.
पुलिस के अनुसार, आरोपी लक्ष्मण सिंह रावत गेल कंपनी का एलपीजी गैस टैंकर लेकर परिसर में पहुंचा और उसे वहीं खड़ा कर दिया. इसके बाद पवन सिंह के साथ काम कर रहे दूसरे आरोपी टैंकर से एलपीजी गैस निकालकर सिलेंडरों में भरने लगे. पुलिस ने मौके से जिन नौ लोगों को अरेस्ट किया है, उनकी पहचान पवन सिंह गुज्जर (26), सुरेश बोरीवाला (35), महेश जांजवडिया (35), पंकज सिंह ठाकुर (26), देवा सिंह (28), सुभाष सिंह राजपूत (28), विशाल भाभोर (24), दीपक भाभोर (26) और लक्ष्मण सिंह रावत (53) के तौर पर हुई है.
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण का विनियमन) आदेश के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि सिलेंडरों में गैस भरने के बाद इन्हें कहां भेजा जाना था और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.



