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ITR में निवेश छिपाना पड़ सकता है भारी, टैक्स एक्सपर्ट से जानें किन बातों का रखें ख्याल

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ITR भरते समय टैक्स एक्सपर्ट या एडवोकेट को पूरे वित्तीय वर्ष की सही और पूरी जानकारी देनी चाहिए. किसी भी आय या लेनदेन को छिपाने से भविष्य में परेशानी हो सकती है. उन्होंने बताया कि सालभर में यदि कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी खरीदता या बेचता है, तो उसकी पूरी जानकारी, दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एक्सपर्ट को देना चाहिए.
इसके अलावा बैंक खाते से हुए बड़े ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, एफडी और सेविंग अकाउंट से मिला ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से हुए कैपिटल गेन, किराये से होने वाली आय और अन्य स्रोतों से मिली रकम की जानकारी भी देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स विभाग के अनुसार ITR भरने से पहले AIS और Form 26AS को जरूर जांचना चाहिए. इनमें दर्ज TDS, TCS और अन्य वित्तीय जानकारी का मिलान बैंक स्टेटमेंट और उपलब्ध दस्तावेजों से करना जरूरी है.
इसके साथ ही Form 16, Form 16A, बैंक स्टेटमेंट, निवेश संबंधी दस्तावेज, होम लोन के ब्याज प्रमाणपत्र और कटौती से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए. सही ITR फॉर्म चुनना, टैक्स रिजीम का विकल्प ध्यान से देखना और रिटर्न समय पर दाखिल कर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी जरूरी है….
आगरा के वरिष्ठ एडवोकेट और इनकम टैक्स व जीएसटी सलाहकार सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आईटीआर भरते समय व्यक्ति को अपनी आय और निवेश से जुड़ी किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति ने हेल्थ इंश्योरेंस कराया है, प्रॉपर्टी खरीदी या बेची है, कहीं से अनुदान प्राप्त हुआ है या रॉयल्टी से आय होती है, तो इसकी जानकारी रिटर्न में सही तरीके से देनी चाहिए.
इसके अलावा पेंशन, ब्याज, किराये से होने वाली आय और अन्य स्रोतों से प्राप्त रकम का भी विवरण देना जरूरी है. एक्सपर्ट के मुताबिक बैंक खातों में हुए बड़े लेनदेन और निवेश की जानकारी भी अपने टैक्स सलाहकार को पूरी तरह उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि रिटर्न सही तरीके से दाखिल हो और भविष्य में आयकर विभाग की ओर से किसी तरह की परेशानी न हो.
12 लाख रूपये तक नहीं इनकम टैक्स पर छूट है
आगरा के वरिष्ठ एडवोकेट और इनकम टैक्स व जीएसटी सलाहकार सुनील कुमार सिंह ने कहा कि नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर धारा 87ए के तहत रिबेट का प्रावधान है. उन्होंने लोगों से ITR भरते समय सभी वित्तीय लेनदेन की सही जानकारी देने की अपील की. उन्होंने कहा कि फोन-पे, पेटीएम या अन्य डिजिटल माध्यमों से किए गए लेनदेन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
बैंक खाते, निवेश, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री और अन्य आय का पूरा रिकॉर्ड टैक्स एक्सपर्ट को उपलब्ध कराना चाहिए. उनके मुताबिक PAN के जरिए आयकर विभाग के पास विभिन्न वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है, इसलिए रिटर्न में गलत या अधूरी जानकारी देने से बचना चाहिए. ITR भरने से पहले बैंक स्टेटमेंट, AIS और Form 26AS की जानकारी का मिलान करना भी जरूरी है.