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दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट का संग्राम, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, 10 पॉइंट में जानें अब तक क्या-क्या हुआ

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दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर घमासान तेज हो गया है. शनिवार को राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. प्रदर्शन रोकने के लिए कई जगह लोगों को हिरासत में लिया गया. मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गईं और ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा. यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में हो रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विवादित बताई जा रही वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया को वापस लिया जाए. अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली विशेष सुनवाई पर नजर है. अदालत में मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर याचिकाएं पहुंची हैं. ऐसे में इस खबर में जानिए शनिवार को आखिर क्या-क्या हुआ और आज की सुनवाई से क्या उम्मीद की जा रही है?
CJP के आयोजकों ने पुलिस कार्रवाई के बावजूद रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर जुटने की अपील की है. दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति बड़ी सभा नहीं होने दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक परिवहन पर रोक को लेकर अदालत के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं हुआ. इसके अलावा हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की स्थिति और उनके ठिकाने से जुड़ा मामला भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. अदालत इन दलीलों पर क्या रुख अपनाती है यह अहम होगा. फिलहाल पूरे घटनाक्रम को इन 10 पॉइंट में समझिए.
  1. CJP ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की: शनिवार को हुई पुलिस कार्रवाई के बाद भी CJP ने प्रदर्शन का आह्वान वापस नहीं लिया है. संगठन के आयोजकों ने समर्थकों से रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने को कहा है. उनकी मुख्य मांग SIR प्रक्रिया को वापस लेने की है. प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी हो रहा है. आयोजकों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका विरोध जारी रहेगा. हालांकि जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने की संभावना है. प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे लोगों को पुलिस के निर्देश और लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेनी चाहिए.
  2. शनिवार को दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया गया: प्रदर्शन को रोकने के लिए शनिवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई जगह पुलिस ने कार्रवाई की. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 5,000 से ज्यादा लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया. इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता, नागरिक समाज से जुड़े लोग और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल बताए गए. हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए कुछ स्थानीय खेल परिसरों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार देर शाम तक करीब 3,000 प्रदर्शनकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के बाद छोड़ दिया गया था. बाकी लोगों की स्थिति और हिरासत की अवधि को लेकर भी सवाल उठे.
  3. CJP के कुछ आयोजकों की हिरासत को लेकर चिंता: प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख आयोजकों की हिरासत भी चर्चा में है. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था. कुछ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के हिरासत में होने की बात भी कही गई है. इसी मामले में अदालत में याचिका दायर कर हिरासत में लिए गए व्यक्ति को पेश करने और हिरासत की वजह बताने की मांग भी की गई है. इस कानूनी प्रक्रिया का मकसद हिरासत में लिए गए व्यक्ति की स्थिति और हिरासत की वैधता से जुड़ी जानकारी अदालत के सामने लाना होता है.
  4. मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं पर पाबंदियों से बढ़ी परेशानी: शनिवार को दिल्ली में सुरक्षा कारणों से मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पहले 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के निर्देश दिए गए थे. बाद में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC ने प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी थी. नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को लेकर भी प्रतिबंधों की बात सामने आई. इन फैसलों से यात्रियों को परेशानी हुई और सार्वजनिक परिवहन के संचालन पर सवाल उठे. इसी को देखते हुए अदालत में कथित आदेश उल्लंघन का मामला पहुंचा है.
  5. सुप्रीम कोर्ट में आज विशेष सुनवाई क्यों हो रही है: सुप्रीम कोर्ट रविवार को इस मामले में विशेष सुनवाई करने वाला है. सुनवाई के लिए जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ गठित किए जाने की जानकारी दी गई है. अदालत के सामने सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों और प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़े मामले हैं. अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं किया. अदालत अभी इन आरोपों पर विचार करेगी. इसलिए सुनवाई से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि अवमानना साबित हो चुकी है या किसी अधिकारी को दोषी ठहराया गया है.
  6. 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर क्या कहा था: इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ी है. एम ए बेबी बनाम भारत सरकार मामले में अदालत ने प्रदर्शन के मद्देनजर सार्वजनिक परिवहन पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों की समीक्षा की थी. सुनवाई के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के संचालन को लेकर उठाए गए कदमों पर चर्चा हुई. अदालत ने सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परिवहन को नियंत्रित करने की गुंजाइश मानी थी. साथ ही सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद करने के बजाय जरूरी व्यवस्थाएं करने की बात कही थी.
  7. अवमानना याचिका में किन अधिकारियों पर लगाए गए आरोप: अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. याचिका में आरोप है कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियां जारी रखीं. याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे यात्रियों को परेशानी हुई और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ. हालांकि ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं. अदालत को संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद ही तय करना होगा कि आदेश का उल्लंघन हुआ या नहीं.
  8. हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों पर भी अदालत की नजर: सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर भी सुनवाई होनी है. यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी की ओर से दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है. इसमें शनिवार के प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति से जुड़ा मामला उठाया गया है. ऐसी याचिका में अदालत से यह जानने की मांग की जा सकती है कि संबंधित व्यक्ति कहां है और उसे किस कानूनी आधार पर हिरासत में रखा गया है. सुनवाई के दौरान अदालत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकती है. आगे क्या निर्देश दिए जाएंगे यह पीठ के फैसले पर निर्भर करेगा.
  9. जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त: रविवार को CJP के दोबारा जुटने के आह्वान के बीच जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रहेगी. पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है लेकिन प्रतिबंधित सुरक्षा क्षेत्रों में बिना जरूरी अनुमति बड़ी सभा नहीं की जा सकती. प्रदर्शन आयोजकों ने समर्थकों से जुटने की अपील की है. ऐसे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति को संभालना अहम होगा. मेट्रो सेवाओं और प्रमुख सड़कों की स्थिति भी आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है.
  10. आज की सुनवाई में किन बातों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में मुख्य रूप से यह देखा जा सकता है कि 9 अक्टूबर के आदेश का पालन हुआ या नहीं और सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंध कितने जरूरी थे. इसके अलावा हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की स्थिति से जुड़े सवाल भी अहम रहेंगे. अदालत अधिकारियों से जवाब मांग सकती है या रिकॉर्ड के आधार पर आगे के निर्देश दे सकती है. हालांकि सुनवाई का नतीजा पहले से तय नहीं माना जा सकता. दूसरी तरफ CJP ने जंतर-मंतर पर सुबह 10 बजे जुटने की अपील की है. ऐसे में रविवार को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन और अदालत की टिप्पणियां पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने वाले अहम पहलू होंगे.