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41 कन्याओं का कराया कन्या भोज, प्राथमिक शाला के बच्चों को मिला न्योता भोज; मध्यान्ह भोजन में ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने की पहल
*कोटा (बिलासपुर), 16 अक्टूबर 2026*
विदेश में रहकर भी अपनी मातृभूमि, संस्कृति और ग्रामीण अंचल के बच्चों से जुड़ाव बनाए रखना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। ऐसा ही सराहनीय कार्य शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला धनरास, विकासखंड कोटा, जिला बिलासपुर में देखने को मिला। बिलासपुर के मूल निवासी एवं वर्तमान में विदेश में कार्यरत रितेश पुराणिक ने विद्यालय में पढ़ने वाली 41 कन्याओं के लिए कन्या भोज तथा प्राथमिक शाला के सभी बच्चों के लिए न्योता भोज का आयोजन कराया। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय परिसर में किचन गार्डन का निर्माण भी कराया, ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन में ताजी सब्जियां उपलब्ध हो सकें।
विद्यालय की शिक्षिका दीप्ति दीक्षित द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर विद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को लगातार साझा किया जाता है। इन्हीं गतिविधियों से प्रभावित होकर रितेश पुराणिक ने विद्यालय से संपर्क किया और बच्चों के लिए इस आयोजन की पहल की। उनकी इस पहल से बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ अपनी परंपराओं और सामाजिक सहभागिता से जुड़ने का अवसर मिला।
कन्या भोज में दिए गए उपहार
आयोजन के दौरान कन्याओं को खीर, पूड़ी, टमाटर की चटनी, छोले, दाल, चावल, पापड़, सलाद और केला सहित विभिन्न व्यंजन परोसे गए। इसके साथ ही सभी कन्याओं को बिंदी, पोनीटेल, चुनरी, मेहंदी, रूमाल, पेन, पेंसिल, क्रेयॉन्स, कंघा, हेयर पिन तथा दक्षिणा उपहार स्वरूप प्रदान की गई।
इस अवसर पर रजनी देवांगन ने अपने जन्मदिवस के उपलक्ष्य में न्योता भोज का आयोजन कर बच्चों के साथ खुशियां साझा कीं।
शिक्षकों और ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
विद्यालय की प्रधान पाठक आशा तिर्की तथा शिक्षक राजकुमार केसरवानी, देवव्रत मिश्रा, वेंकटेश्वर सिंह दीक्षित, रजनी देवांगन, नूरजहां बानो और दीप्ति दीक्षित ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। दोनों विद्यालयों की रसोइयों तथा स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में करगी कला मंडल के अध्यक्ष भोजेश्वर रजक एवं उनकी धर्मपत्नी राधिका रजक, ग्राम सरपंच गायत्री करसायल, एसएमसी अध्यक्ष सोनाक्षी यादव, हाई स्कूल के प्राचार्य डॉ. चंद्रशेखर गुप्ता तथा फणेश मेश्राम सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
धनरास विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम समाज और विद्यालय के बीच सहभागिता का उदाहरण है। विदेश में रहते हुए भी रितेश पुराणिक द्वारा ग्रामीण बच्चों की शिक्षा, पोषण और विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए किया गया प्रयास यह संदेश देता है कि अपनी जन्मभूमि से जुड़कर समाज के विकास में योगदान देने के लिए दूरी कोई बाधा नहीं है।



