घर बदला तो मतदाता सूची से हट गया नाम
- याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, जब मतदाता सूची के लिए फॉर्म भरे जा रहे थे, उस समय वे अपना पुराना घर छोड़ चुके थे. इस कारण वे अपना फॉर्म नहीं भर पाए और उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग से अपने मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को नए पते पर ट्रांसफर करने की मांग की थी.
- इसके लिए याचिकाकर्ताओं ने फॉर्म-8 भरने की अनुमति मांगी थी. फॉर्म-8 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को ठीक कराने या पता बदलने के लिए किया जाता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्हें पहले से दर्ज मतदाता रिकॉर्ड को नए पते पर ट्रांसफर करने का मौका मिलना चाहिए, न कि नए मतदाता के तौर पर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना पड़े.
- हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया. जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करने से इनकार कर दिया.
- सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील संजय वशिष्ठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं, तो वे ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के नियम 25(2) और नियम 13(1)(ए) के तहत फॉर्म-6 भरकर जमा कर सकते हैं. फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-8 मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में बदलाव या पता बदलने के लिए है.
- इस तरह चुनाव आयोग ने याचिकाकर्ता को पुराने रिकॉर्ड को ट्रांसफर कराने के बजाय फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने का रास्ता सुझाया है. चुनाव आयोग के वकील ने यह भी बताया कि सुनवाई की पिछली तारीख पर उन्होंने निलोत्पल दत्त से फॉर्म-6 भरने का अनुरोध किया था. साथ ही भरोसा दिया था कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी इस प्रक्रिया में उनकी मदद करेंगे. इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने फॉर्म भरने का फैसला नहीं किया.
याचिकाकर्ता निलोत्पल दत्त की एक आशंका यह भी थी कि अगर वे फॉर्म-6 भरते हैं, तो उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया जा सकता है. चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिया कि फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने पर उनके खिलाफ गलत घोषणा करने का आरोप नहीं लगाया जाएगा.



