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किसानों के द्वार पहुँचेगा वैज्ञानिक ज्ञान: घुटकु में कृषि सूचना केंद्र-सह-प्रदर्शनी का शुभारंभ

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आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा परीक्षण, जैव उर्वरकों एवं समेकित कीट प्रबंधन पर किसानों को मिली महत्वपूर्ण जानकारी

बिलासपुर, 22 अक्टूबर 2026।किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा कृषि संबंधी नवीनतम जानकारियों को गाँव तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम घुटकु स्थित महतारी सदन में कृषि सूचना केंद्र-सह-प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। केंद्र का उद्घाटन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे एवं जनपद सदस्य श्री रवि कुमार सोनी ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर आयोजित कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, जैविक आदानों, फसल सुरक्षा तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

वैज्ञानिक खेती से समृद्धि की ओर बढ़ेंगे किसान

कार्यक्रम में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हेम प्रकाश वर्मा ने अतिथियों, कृषकों एवं ग्रामवासियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि सूचना केंद्र किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय पर बल देते हुए कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में नवाचार, तकनीकी जागरूकता तथा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को कृषि क्षेत्र में आगे आने, कृषि आधारित स्वरोजगार अपनाने तथा खेती को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, हरित क्रांति की भावना को आगे बढ़ाते हुए उत्पादन के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने का संदेश दिया।

फसल विविधीकरण और मृदा स्वास्थ्य पर विशेष जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने फसल विविधीकरण, सीमित कृषि भूमि में लाभकारी फसलों के चयन तथा मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने किसानों को क्रॉप डॉक्टर ऐप जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने तथा कृषि विज्ञान केंद्रों से नियमित तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने की सलाह दी।

डॉ. चौरे ने जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के समुचित उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा समेकित कीट प्रबंधन को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के विवेकपूर्ण उपयोग से उत्पादन लागत कम करने, मृदा की उर्वरता बनाए रखने तथा कृषि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहायता मिल सकती है।

प्रयोगशाला से खेत तक पहुँचे वैज्ञानिक तकनीकें

विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त होगा, जब उन्हें किसानों तक सरल, व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से पहुँचाया जाए। ऐसे कृषि सूचना केंद्र किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने तथा उनकी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संतुलित कृषि आदानों और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान

श्रीमती गीता देवांगन, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में हुए सकारात्मक बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने मृदा परीक्षण के महत्व, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के असंतुलित उपयोग से होने वाले संभावित नुकसान तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों से कृषि आदानों का उपयोग अनुशंसित मात्रा एवं उचित समय पर करने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की।

फसल सुरक्षा और सुरक्षित सब्जी उत्पादन पर मार्गदर्शन

डॉ. यशपाल सिंह निराला ने उन्नत कृषि पद्धतियों, फसल सुरक्षा और कीट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने फसल कटाई के निकट कीटनाशकों के अनुचित प्रयोग से बचने, निर्धारित प्रतीक्षा अवधि का पालन करने तथा सब्जियों की स्वच्छता और सुरक्षित उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। किसानों से सहज संवाद स्थापित करने के लिए उन्होंने स्थानीय छत्तीसगढ़ी कहावतों का भी उपयोग किया। उनके इस प्रयास ने क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से कृषि संबंधी वैज्ञानिक संदेशों को अधिक सरल, सहज और प्रभावी बनाने का उदाहरण प्रस्तुत किया।

कृषि विकास में युवाओं और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी आवश्यक

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद सदस्य श्री रवि कुमार सोनी ने कृषि विकास में किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गाँवों में वैज्ञानिक कृषि जानकारी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई दिशा प्राप्त होगी।

ग्राम सरपंच श्री तिलक चंद वर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, कृषि वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं कृषकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कृषि सूचना केंद्र की स्थापना को ग्रामवासियों के लिए उपयोगी पहल बताया।

कृषि प्रदर्शनी में दिखाई गईं उपयोगी वैज्ञानिक तकनीकें

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कृषि प्रदर्शनी रही, जिसमें किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा फसल स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए उपयोगी जैविक आदानों और तकनीकी संसाधनों का परिचय कराया गया। प्रदर्शनी में जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के साथ ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास और बेसिलस जैसे उपयोगी सूक्ष्मजीव आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसके अतिरिक्त गेहूँ की उन्नत किस्मों तथा कीट पहचान पेटी के माध्यम से फसलों में लगने वाले कीटों की पहचान और फसल सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई।

प्रदर्शनी ने किसानों को विभिन्न कृषि आदानों की उपयोगिता समझने तथा वैज्ञानिक खेती की व्यावहारिक प्रक्रियाओं से परिचित होने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि पंचांग तथा एक-एक पौधा भेंट किया गया। इस पहल के माध्यम से कृषि संबंधी जानकारी के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं पौधरोपण का संदेश भी दिया गया।

विश्वविद्यालय और किसानों के बीच मजबूत होगा संवाद

कार्यक्रम में ग्राम घुटकु के कृषक एवं महिला कृषक, ग्राम के प्रमुख प्रतिनिधि, महाविद्यालय के प्राध्यापक तथा बी.एससी. कृषि चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विद्यार्थियों के लिए यह गतिविधि ग्रामीण परिस्थितियों को समझने, किसानों की समस्याओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने और कृषि विस्तार के व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर रही।

घुटकु में कृषि सूचना केंद्र-सह-प्रदर्शनी की स्थापना केवल एक कार्यक्रम तक सीमित पहल नहीं, बल्कि वैज्ञानिक ज्ञान को किसानों के द्वार तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास है। इससे किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा कृषि वैज्ञानिकों से संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह पहल कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार को एक सूत्र में जोड़ते हुए वैज्ञानिक खेती, किसान सशक्तीकरण और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।