Home देश लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में किया गया शिफ्ट,

लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में किया गया शिफ्ट,

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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘दो सौ खोली’ में शिफ्ट किए जाने की खबर है. सूत्रों के मुताबिक इस ब्लॉक में आतंकवाद और गंभीर अपराधों से जुड़े करीब 200 कैदी रखे जाते हैं. . रिपोर्ट के अनुसार जेल में उसकी निगरानी चौबीसों घंटे होती है और बाहरी संपर्क सीमित हैं. जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पिछले दो सालों में उससे सीधे किए गए किसी फोन या संवाद का पता नहीं चला है. हालांकि जेल के भीतर उसकी दिनचर्या और बाहरी नेटवर्क से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

कुछ साल पहले तक बिश्नोई अलग-अलग जेलों में रहते हुए कथित तौर पर जबरन वसूली के लिए फोन करवाता था और धमकी भरे ऑडियो-वीडियो संदेश भी सामने आते थे. जेल से इंटरव्यू देने को लेकर भी वह सुर्खियों में रहा है. हालांकि जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पिछले दो सालों में उसकी ओर से सीधे किए गए किसी फोन या संवाद का पता नहीं चला है. अब साबरमती जेल में उसकी निगरानी चौबीसों घंटे की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक उसकी बाहरी दुनिया से बातचीत मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली अदालत की सुनवाई और वकील के साथ कानूनी रणनीति पर चर्चा तक सीमित है.

क्या है साबरमती जेल का ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक?
‘दो सौ खोली’ साबरमती सेंट्रल जेल का अधिक सुरक्षा वाला हिस्सा बताया जाता है. इसमें करीब 200 कैदियों को रखने की व्यवस्था है. आतंकवाद और गंभीर अपराधों में आरोपी या दोषी कैदियों को यहां रखा जाता है. सुरक्षा व्यवस्था के तहत ब्लॉक को चार हिस्सों में बांटा गया है ताकि अलग-अलग समूहों के बीच आवाजाही रोकी जा सके. सूत्रों के मुताबिक बिश्नोई को पहले ‘दस खोली’ नाम के छोटे हाई-सिक्योरिटी हिस्से में रखा गया था. उसमें करीब 10 कैदियों के रहने की व्यवस्था थी. इससे पहले वह तिहाड़ और पंजाब की अलग-अलग जेलों में भी रह चुका है.

जेल के भीतर सख्त निगरानी में बिश्नोई
रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई को जेल के भीतर अलग-थलग रखकर उसकी गतिविधियों पर निगरानी की जाती है. सूत्रों का कहना है कि वह सुबह ध्यान करता है और हनुमान चालीसा का पाठ करता है. उसके बारे में नियमित व्रत रखने और शाकाहारी भोजन करने की बात भी कही गई है. सुरक्षा व्यवस्था के तहत उसकी गतिविधियों और बाहरी संपर्कों को सीमित रखने पर जोर दिया जा रहा है.

जेल में बंद होने के बावजूद नेटवर्क सक्रिय होने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिश्नोई के जेल में रहने के बावजूद उसका गिरोह विदेशों में मौजूद सहयोगियों के जरिए सक्रिय है. बताया जाता है कि उसके कुछ प्रमुख सहयोगी विदेशों में सुरक्षित ठिकानों से नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभाते हैं. इन लोगों पर भर्ती, काम सौंपने, पैसों की व्यवस्था और निशाने तय करने जैसे कामों में शामिल होने का आरोप है. गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे नाम भी इस नेटवर्क से जोड़े जाते रहे हैं. हालांकि जेल से बाहर मौजूद कथित नेटवर्क की गतिविधियों और बिश्नोई से उनके सीधे संपर्क को लेकर जांच एजेंसियों की ओर से दी गई जानकारी ही निर्णायक होगी.