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BSNL शुरू कर रहा इंट्रा सर्कल रोम‍िंग, क्‍या है ये, और क्‍या दूसरे नेटवर्क पर भी म‍िलेगा फायदा?

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सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL देश के कई हिस्सों में इंट्रा सर्कल रोमिंग (Intra Circle Roaming – ICR) शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसका मकसद नेटवर्क की समस्‍या को दूर करना है. लेकिन ड‍िटेल में समझते हैं क‍ि आख‍िर इंट्रा सर्कल रोमिंग होती क्‍या है, इसका फायदा क्‍या होगा और क्‍या दूसरे नेटवर्क के लोग भी इसका लाभ ले पाएंगे.
BSNL के ग्राहक कभी-कभी नेटवर्क न आने से परेशान रहते हैं. अब आपकी यह श‍िकायत दूर होने वाली है. बीएसएनएल देश भर के 12 से 13 टेलीकॉम सर्किलों में इंट्रा सर्कल रोमिंग सर्विस को शुरू कर रही है. इसके चालू होने के बाद BSNL के ग्राहक उन जगहों पर दूसरे ऑपरेटरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकेंगे, जहां BSNL का अपना टावर या कवरेज नहीं है.
डील लगभग फाइनल
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक- BSNL का अन्य टेलीकॉम कंपनियों के साथ यह समझौता लगभग फाइनल हो चुका है और जल्द ही इस डील पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

क्या है इंट्रा सर्कल रोमिंग
आम तौर पर जब आप अपने राज्य से बाहर जाते हैं, तो आपका फोन रोमिंग पर चला जाता है और वह दूसरे नेटवर्क से जुड़ जाता है. लेकिन इंट्रा सर्कल रोमिंग का मतलब है कि आप अपने ही राज्य या अपने ही सर्कल के भीतर रोमिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं.
मान लीजिए आप दिल्ली सर्कल में हैं और आपके पास BSNL की सिम है. आप दिल्ली के किसी ऐसे इलाके में जाते हैं जहां BSNL का टावर काम नहीं कर रहा है या वहां कवरेज नहीं है. अगर BSNL का किसी अन्य कंपनी के साथ ICR समझौता है, तो आपके फोन के सिग्नल गायब नहीं होंगे. आपका फोन अपने आप कंपनी उस दूसरी कंपनी के नेटवर्क से जुड़ जाएगा और आप बिना किसी रुकावट के कॉल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे.
क्या दूसरे नेटवर्क पर भी मिलेगा BSNL ग्राहकों को फायदा?
बिल्कुल. यही इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा है. ग्राहकों को यह पता भी नहीं चलेगा कि उनका फोन BSNL के नेटवर्क से हटकर किसी और नेटवर्क पर चला गया है. यह प्रक्रिया बैकग्राउंड में ऑटोमैटिक तरीके से हो जाती है.

जहां BSNL के सिग्नल कमजोर होंगे, वहां फोन दूसरे पार्टनर नेटवर्क पर स्विच हो जाएगा, जिससे कॉल कटने की समस्या खत्म हो जाएगी.
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां केवल एक या दो कंपनियों के टावर होते हैं, वहां ICR के जरिए BSNL के ग्राहक भी हाई-स्पीड इंटरनेट और कॉलिंग का मजा ले सकेंगे.
सबसे खास बात, इसके लिए ग्राहकों को कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा. यह दो टेलीकॉम कंपनियों के बीच का आपसी व्यावसायिक समझौता होगा.

आपदा के वक्‍त बनेगा संजीवनी
ICR प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों की जान बचाने का सबसे बड़ा हथियार साबित होती है. जुलाई में ड‍िपार्टमेंट ऑफ टेल‍ीकम्‍युन‍िकेशन ने बताया था क‍ि जम्मू-कश्मीर, असम और नागालैंड में भारी बारिश, बादल फटने और लैंडस्‍लाइड से तबाही मची थी. कम्‍युन‍िकेशन नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो गया था. तभी इमरजेंसी रिस्पॉन्स मैकेनिज्म एक्टिवेट किया गया और सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को आदेश दिया कि वे प्रभावित इलाकों में तुरंत ICR लागू करें. जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिले, असम के शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिले और नागालैंड के मोन जिले में यह लागू क‍िया जा चुका है.

आपदा में ICR कैसे काम करता है?
जब DoT इमरजेंसी में ICR एक्टिवेट करता है, तो कंपनियों के बीच के व्यावसायिक समझौते मायने नहीं रखते. उस प्रभावित इलाके में मौजूद किसी भी कंपनी का मोबाइल सब्सक्राइबर, किसी भी अन्य उपलब्ध नेटवर्क से जुड़ सकता है. मान लीजिए लैंडस्‍लाइड में BSNL और Jio के टावर गिर गए, लेकिन Airtel का टावर सुरक्षित है. तो ICR लागू होते ही BSNL और Jio के ग्राहकों के फोन भी Airtel के नेटवर्क से अपने आप कनेक्ट हो जाएंगे. इससे प्रभावित निवासियों, रेस्‍क्‍यू चला रही टीमों को काफी मदद म‍िलती है. उनका संपर्क नहीं टूटता.