मिडिल ईस्ट में एक बार फिर महायुद्ध की तैयारी हो रही है. एक तरफ ईरान अपने परमाणु ठिकानों के पास रहने वाले नागरिकों को एंटी-रेडिएशन आयोडिन की गोलियां बांट रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने पूरे मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने नागरिकों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से आ रहे आक्रामक बयानों और पेंटागन की सैन्य तैयारियों ने ये साफ कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी वक्त कोई बहुत बड़ा धमाका हो सकता है.
ईरान और अमेरिका के बीच फिर बिगड़ेंगे हालात?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि नक्लियर प्लांट्स के 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को प्रिवेंटिव मेडिसिन यानी आयोडिन की गोलियां बांटी जा रही हैं. जब ईरानी अधिकारी से पूछा गया कि क्या अमेरिका के हमले के डर से ये कदम उठाया जा रहा है, तो उन्होंने साफ कहा कि डोनाल्ड ट्रंप पर अब बिल्कुल भरोसा नहीं किया जा सकता और वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.
9 नवंबर की रात क्या होगा? ट्रंप बोले- ‘सब जल्द पता चलेगा’
ईरान के इस खौफ के पीछे की सबसे बड़ी वजह है अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाशिंगटन ईरान के सबसे सुरक्षित और मजबूत माने जाने वाले ‘पिकैक्स माउंटेन’ न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
व्हाइट हाउस में हाई-लेवल मीटिंग: फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ व्हाइट हाउस में लगातार दो दिन (बुधवार और गुरुवार) मैराथन बैठकें की हैं. इस बैठक का मुख्य एजेंडा यही था कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को दोबारा शुरू किया जाए.
ट्रंप की सीधी चेतावनी: ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेंगे. ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, ‘मैं देश के बाकी हिस्से को तबाह नहीं करना चाहता, लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े. आप लोगों को जल्द ही सब पता चल जाएगा’.
9 नवंबर की काली रात और सैन्य गणित: फॉक्स न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प और डरावना गणित समझाया है. 9 नवंबर को मिडिल ईस्ट के आसमान में न्यू मून होगा, जिससे रात में चांद की रोशनी न के बराबर होगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंधेरे का फायदा उठाकर अमेरिकी सेना बड़ी हवाई कार्रवाई को अंजाम दे सकती है.
ईरान का आयोडिन गोलियों बांटना इस बात का सबूत है कि तेहरान अब किसी भी न्यूक्लियर इमरजेंसी या अपने परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले को लेकर मानसिक रूप से तैयार हो रहा है.
आयोडिन टेबलेट्स का काम: किसी भी परमाणु हमले या लीकेज की स्थिति में हवा में खतरनाक रेडियोएक्टिव आयोडिन फैल जाता है. ये गोलियां इंसान के थायरॉयड ग्लैंड को रेडियोएक्टिव आयोडिन सोखने से रोकती हैं, जिससे कैंसर और रेडिएशन से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाव होता है.
गंभीर स्थिति का संकेत: आमतौर पर इस तरह की दवाइयां युद्ध की बेहद भयावह स्थिति में ही बांटी जाती हैं. 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में दवाइयां बांटकर ईरान अपने नागरिकों को सम्भावित रेडिएशन खतरे से बचाने की तैयारी कर रहा है.
अमेरिका ने जारी की एडवाइजरी, गल्फ देशों में उड़ानें रद्द होने का खतरा
ईरान की तैयारियों के बीच अमेरिका भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है. यूनाइटेड स्टेट्स मिशन (यूएई) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पूरे मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने को कहा गया है.
हूती और ईरानी हमलों का डर: अमेरिका को डर है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही और ईरानी एजेंसियां क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सरकारी अधिकारियों और नागरिकों को निशाना बना सकती हैं.
ट्रैवल अलर्ट और एयरस्पेस बंद होने की आशंका: अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि बढ़ते तनाव के कारण फ्लाइट्स कैंसिल हो सकती हैं, एयरस्पेस बंद किए जा सकते हैं और पूरे रीजन में आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है.
सेंटकॉम की तैयारी पूरी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं, बस अब वाशिंगटन से आधिकारिक हरी झंडी का इंतजार है.



