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‘सौभाग्य की बात…’ पीएम मोदी ने RSS संस्थापक डॉ. हेडगेवार को दी पुष्पांजलि, संघ में पुराने दिनों को किया याद

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नागपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति में बने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की. इस मौके पर RSS प्रमुख मोहन भागवत भी उपस्थित रहे. उन्होंने यहां RSS के संस्थापक और दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को भी श्रद्धांजलि दी.

इस दौरान आरएसएस के प्रशासनिक मुख्यालय रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर में मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संघ के पूर्व महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे. उन्होंने स्मारक स्थित स्मृति भवन में आरएसएस के पदाधिकारियों से भी मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं.

पीएम मोदी ने स्मृति मंदिर में एक संदेश पुस्तिका पर लिखा कि ये स्मारक भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और संगठन के मूल्यों को समर्पित हैं. प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, ‘आरएसएस के दो मजबूत स्तंभों का स्मारक उन लाखों स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा है जिन्होंने राष्ट्र की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया है.’ उन्होंने कहा, ‘मैं स्मृति मंदिर में आकर अभिभूत हूं. यह स्थल परम पूज्य डॉ. हेडगेवार और पूज्य गुरुजी की यादों को संजोए हुए है.’

पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार इस स्मारक का दौरा किया है. इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी ने 27 अगस्त 2000 को डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर का दौरा किया था. उस समय वह प्रधानमंत्री थे.

पीएम मोदी ऐसे समय स्मृति मंदिर पहुंचे जब रविवार को संघ का प्रतिपदा कार्यक्रम है जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत के उपलक्ष्य में गुड़ी पड़वा के अवसर पर मनाया जाता है. प्रधानमंत्री ने रविवार को नागपुर में दीक्षाभूमि का भी दौरा किया और डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की. दीक्षाभूमि पर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 1956 में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था.

इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी थे. पीएम मोदी का स्वागत दीक्षाभूमि के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन शुरेई ससाई ने किया. पीएम मोदी ने महात्मा बुद्ध की पूजा-अर्चना भी की.

पीएम नरेंद्र मोदी ने दीक्षाभूमि की रिकॉर्ड बुक में खास संदेश लिखा. उन्होंने बुक में लिखा, ‘बाबा साहेब के पंचतीर्थों में से एक नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में आने का सौभाग्य पाकर अभिभूत हूं. इस पवित्र स्थल के वातावरण में बाबा साहेब के सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के सिद्धांतों का सहज अनुभव होता है. दीक्षाभूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करता है.’

पीएम मोदी ने यह भी लिखा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अमृत कालखंड में हम बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं और मूल्यों पर चलते हुए देश को प्रगति के नए शिखर पर लेकर जाएंगे. एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.’

दीक्षाभूमि पिछले कई सालों से विश्व स्तर पर प्रसिद्ध स्थान रही है. यह लाखों लोगों के लिए विचारों और कार्यों के परिवर्तन का स्थान है. दीक्षाभूमि मूल बौद्ध वास्तुकला की तर्ज पर बनाई गई है, जो मध्य प्रदेश के सांची में महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध स्तूप की प्रतिकृति है. यह एशियाई महाद्वीप का अब तक का सबसे बड़ा स्तूप है. इसका उद्घाटन 18 दिसंबर, 2001 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने किया था.

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