दो साल पहले जब मालदीव में सत्ता परिवर्तन हुआ, और मुहम्मद मुइज्जू राष्ट्रपति बने तो भारत और मालदीव के रिश्ते रसातल में चले गए. ‘इंडिया आउट’ का नारा देकर सत्ता में आए मुइज्जू भारत विरोधी बयानबाजी करने लगे. चीन के गुणगान करते नजर आए. लेकिन भारत की कूटनीति ने ऐसा कमाल किया कि वही मालदीव चीन छोड़कर अब भारत की गोद में आ बैठा है. पीएम मोदी के दौरे से पहले मालदीव में खूब चर्चा है. वहां के पूर्व विदेश मंत्री ने तो यहां तक कह दिया ‘भारत का दिल बहुत बड़ा है. उसके बिना मालदीव का काम नहीं चल सकता.’
राजीव भाटिया कहते हैं, मुहम्मद मुइज्जू को चीन से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन वह पूरी नहीं हुईं. भारत ने स्थिति को परिपक्वता और व्यावहारिकता से संभाला. हमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मालदीव में अपने अच्छे काम जारी रखे. फिर हमारे विदेश मंत्री ने मालदीव का दौरा किया और मुइज्जू पिछले साल भारत आए.



