बाजार में प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार पर कलेक्टर ने दिया जोर*
*समूह की महिलाओं द्वारा उत्पादित-निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर एवं प्रतिभागियों ने किया अवलोकन*
*समूह की महिलाओं ने आजीविका गतिविधियों से लखपति दीदी बनने तक की सुनाई कहानी*
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही,ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अन्तर्गत लखपति दीदी के लिए ’एक पहल आजीविका की ओर’ विषय पर स्वसहायता समूहों की कंजरवेंस, विपणन, मार्केटिंग सह मीडिया के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत द्वारा मल्टीपरपज स्कूल पेण्ड्रा के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जिले में बिहान के अन्तर्गत लगभग 5500 समूहों में 1 लाख 25 हजार महिलाए जुड़ी है। इनमें से 18 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं। समूह की सभी महिलाएं लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो जांए, इसके लिए समन्वित प्रयासों की जरुरत है। इसी उददेश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं बड़ी, पापड़, आचार बनाने की परंपरा से ऊपर उठ कर सौंदर्य प्रसाधन, सिलाई, थ्रेसर, ईंट निर्माण आदि गतिविधियों से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए उत्पादों की गुणवत्ता बरकरार रखना है। साथ ही पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए अपने दुकानों में समूह के उत्पादों को स्थान देने व्यापारियों से और उत्पादों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया से अनुरोध किया। उन्होंने यह भी बताया कि समूहों द्वारा उत्पादित कोदो, शहद, ब्लेक राईस आदि को अरपा बिहान ब्रांड के नाम से विक्रय किया जा रहा है। इस कार्य में तिपान महिला फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी लिमिटेड और मलनिया महिला फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी लिमिटेड द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
जिला पंचायत के उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि मार्केट में जरुरत के अनुसार उत्पाद करके आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने शादी-ब्याह आदि समारोहों में प्लास्टिक से बने दोना, पत्तल का उपयोग नहीं करते हुए समूह द्वारा सरई और मोहलाईन के पत्तों से निर्मित दोना पत्तल का उपयोग करने कहा। उन्होंने कहा कि समूह द्वारा निर्मित खाद्य पदार्थ शुध्द और स्वादिष्ट होते हैं। उन्होंने समूह द्वारा निर्मित महुआ के लडडु को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और गुणकारी बताया। उन्होंने प्रशासन द्वारा समूहों को बैंक लिंकेज के माध्यम से आर्थिक सहयोग प्रदान करने के साथ ही अपने स्तर पर भी हर संभव सहयोग प्रदान करने की बात कही।
जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि श्री पूरन छाबड़िया और मीडिया प्रतिनिधि असद सिददीकी ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने आजीविका गतिविधियों के तहत महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए समन्वित प्रयास की जरुरतों पर बल दिया। कार्यशाला में बिहान के तहत आजीविका गतिविधियां अपना कर लखपति दीदी बनी अनेक महिलाओं ने अपनी कहानी सुनाई। ग्राम पंचायत कोडगार की गीतांजली महिला स्वसहायता समूह की मीना साहू ने थ्रेसर, ट्रेक्टर, किराना व्यवसाय से लखपति दीदी बनने, ग्राम भदौरा की मातारानी स्वसहायता समूह की भारती राठौर ने सिलाई, मनिहारी, फोटो कॅापी, सब्जि बाड़ी एवं मछली पालन व्यवसाय से लखपति दीदी बनने, ग्राम कोटमी की गोड़वाना स्वसहायता समूह की सुशीला ने अगर बत्ती निर्माण, सिंघाड़ा उत्पादन, सब्जि बाड़ी से लखपति दीदी बनने, बस्तीबगरा की जय अम्बे समूह की खुशबू यादव ने विष्णुभोग चावल के व्यवसाय से लखपति दीदी बनने की कहानी सुनाई।
इसी तरह बचरवार, सारबहरा, तरईगांव सहित विभिन्न पंचायतों की स्वसहायता समूहों द्वारा विभिन्न आजीविका गतिविधियों से लखपति दीदी बनने तक की सफर की कहानी सुनाई। लखपति दीदीयों को उनकी सफलता पर स्मृति चिन्ह और प्रशस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया। ऑडिटोरियम परिसर में विभिन्न समूहों द्वारा उनके उत्पादों की लगाई गइ प्रदर्शनी का अवलोकन कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ राज्य एवं जीपीएम जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने शपथ दिलाई। कार्यशाला में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती बूंद कुंवर मास्को सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं समूह की महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।



