


“विज्ञान में महिलाएँ : विकसित भारत के निर्माण की प्रेरक शक्ति” विषय पर हुआ मंथन
बिलासपुर। डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “विज्ञान में महिलाएँ : विकसित भारत के निर्माण की प्रेरक शक्ति” रखा गया, जिसमें विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एकता ताम्रकार रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज महिलाएँ अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान और तकनीकी नवाचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या सीमित थी, किंतु आज वे नेतृत्वकारी भूमिकाओं में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
डॉ. ताम्रकार ने कहा कि भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने देश और विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे आत्मविश्वास के साथ विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे आएँ और अपने कौशल, ज्ञान तथा नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय में सबसे अधिक छात्राओं की संख्या विज्ञान फार्मेसी और इंजीनियरिंग में है निश्चित रूप से यही छात्राएं भारत के भविष्य का निर्माण करेंगे।
विश्वविद्यालय की समकुलपति प्रोफेसर जयति चटर्जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बालिकाओं के मन में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम थी, किंतु आज यह सहभागिता बराबरी की हो चुकी है, जो समाज के लिए अत्यंत सकारात्मक संकेत है।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. श्रीवास्तव ने दिया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अमित शर्मा रहे तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रश्मि वर्मा ने किया।
संगोष्ठी में ई राघवेंद्र राव शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने दस दिनों तक प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने-अपने परियोजनाओं पर कार्य किया। समापन अवसर पर अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।




