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1 सितंबर से बदल जाएंगे ऑनलाइन शॉपिंग के नियम, फेक डिस्काउंट बंद, छिपे हुए चार्ज पर रोक

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ऑनलाइन शॉपिंग में कई बार किसी सामान की पुरानी कीमत बहुत ज्यादा दिखाकर उस पर भारी डिस्काउंट दिखाया जाता है. ग्राहक को लगता है कि उसे बड़ी बचत हो रही है, लेकिन असल में सामान कुछ समय पहले कम कीमत पर भी बिक चुका होता है. अब सरकार ऐसे फर्जी डिस्काउंट के तरीके पर लगाम लगाने की तैयारी में है. नए ई-कॉमर्स नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और कंपनियों को कीमत से लेकर प्रोडक्ट की जानकारी और ग्राहक के डेटा तक कई चीजों में ज्यादा पारदर्शिता रखनी होगी.
नए नियमों के मुताबिक, किसी प्रोडक्ट पर डिस्काउंट दिखाते समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को उसकी पुरानी कीमत भी बतानी होगी. यह पुरानी कीमत पिछले 30 दिनों में उस प्रोडक्ट की सबसे कम कीमत के आधार पर तय होगी. इससे ग्राहक को पता चल सकेगा कि कंपनी वास्तव में कितनी छूट दे रही है और कहीं पहले कीमत बढ़ाकर बाद में बड़ा डिस्काउंट तो नहीं दिखाया जा रहा.

डार्क पैटर्न पर भी सख्ती
ग्राहकों को किसी खास सामान की खरीदारी के लिए भ्रमित करने या दबाव बनाने वाले तरीकों यानी डार्क पैटर्न पर भी रोक लगाने की तैयारी है. ई-कॉमर्स कंपनियों को हर साल खुद जांचना होगा कि उनका प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन कर रहा है या नहीं. इसके साथ अनुपालन का सर्टिफिकेट भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना होगा

प्रोडक्ट की जरूरी जानकारी छिपाना मुश्किल
ग्राहक को सामान खरीदने से पहले एक्सपायरी या बेस्ट बिफोर डेट, रिटर्न और रिफंड पॉलिसी, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट से जुड़ी जरूरी जानकारी साफ तौर पर देनी होगी. अगर कोई सामान विदेश से आयात किया गया है तो उसके निर्माण वाले देश और आयातक की जानकारी भी देनी होगी.

शिकायत की कॉपी और डेटा पर भी नियम
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करने वाले ग्राहक को उसकी शिकायत की कॉपी देनी होगी. कंपनियों के लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से जुड़ना भी जरूरी किया गया है. इसके अलावा ग्राहक की निजी जानकारी का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के लिए उसकी स्पष्ट मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकेगा.

छिपी फीस वसूलना भी आसान नहीं होगा
ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसी सेवाओं के लिए अलग से फीस नहीं वसूल सकेंगी, जिनका उनकी मुख्य सेवा से सीधा संबंध नहीं है. हालांकि, लॉयल्टी और मेंबरशिप प्रोग्राम को इससे छूट दी गई है. सरकार का कहना है कि ऑनलाइन कारोबार और तकनीक में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है. इसी वजह से साल 2020 में लागू ई-कॉमर्स नियमों को अपडेट किया गया है.