अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 15-16 सितंबर की बैठक का आज आखिरी दिन है. फेड के ब्याज दर फैसले पर पूरी दुनिया के बाजारों की नजर है, क्योंकि अमेरिका की ब्याज दरों में बदलाव का असर सिर्फ वहां की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता. डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, सोना और दुनिया भर के शेयर बाजारों में इसका असर दिखाई देता है. भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह फैसला विदेशी निवेश और रुपये की चाल के लिहाज से भी अहम है.
मौजूदा फेडरल फंड्स रेट 3.50%-3.75% है. इस बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद सबसे ज्यादा है. 16 सितंबर की सुबह फेड फंड्स फ्यूचर्स में करीब 92.5% संभावना 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की दिखाई जा रही थी. यह बढ़ोतरी हुई तो दर 3.75%-4% हो जाएगी और यह जुलाई 2023 के बाद अमेरिका में पहली दर बढ़ोतरी होगी.
50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई तो क्या होगा
ऐसे फैसले से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में तेजी आ सकती है. ज्यादा ब्याज मिलने की उम्मीद में निवेशक जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर की तरफ जा सकते हैं. इसका असर अमेरिकी और दूसरे देशों के शेयर बाजारों पर बिकवाली के रूप में दिख सकता है.
भारतीय शेयर बाजार पर क्यों पड़ेगा असर
भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई अमेरिकी ब्याज दरों को काफी करीब से देखते हैं. अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ती है तो भारत जैसे बाजारों से पैसा निकलने का दबाव बढ़ सकता है.
इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ सकता है. खासकर महंगे वैल्यूएशन वाले और ग्रोथ आधारित शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है. हालांकि, 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी अगर बाजार की उम्मीद के मुताबिक होती है तो शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद निवेशक फेड चेयर के आगे के संकेतों पर ज्यादा ध्यान देंगे.
रुपये और सोने पर भी नजर
अमेरिकी दरें बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ तो भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. अभी भी फेड के फैसले से पहले रुपया 95.95 प्रति डॉलर के आसपास छह हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच चुका था. ऊंचे कच्चे तेल के दाम और मजबूत डॉलर ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है.
सोने पर भी शुरुआती दबाव आ सकता है, क्योंकि मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड सोने को कम आकर्षक बनाती है. हालांकि, अगर दर बढ़ने के बाद शेयर बाजारों में ज्यादा डर फैलता है तो सुरक्षित निवेश की मांग सोने को फिर सहारा दे सकती है.
2022 का सबक, सिर्फ रेट नहीं बयान भी मायने रखता है
मई 2022 में फेड ने 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी. फैसले के दिन अमेरिकी शेयर बाजार में तेज उछाल आया, लेकिन अगले दिन तस्वीर पूरी तरह पलट गई. एसएंडपी 500 करीब 3.6% और नैस्डैक करीब 5% टूट गया. बाजार को चिंता होने लगी कि आगे भी फेड लगातार आक्रामक तरीके से दरें बढ़ा सकता है.



