सरकार का कहना है कि नए फैसले से वास्तविक औद्योगिक उपभोक्ताओं को अतिरिक्त स्टॉक रखने में सुविधा मिलेगी, लेकिन घरेलू बाजार की चीनी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा. इसकी वजह यह है कि जो स्टॉक लिमिट बढ़ाने की अनुमति दी गई है, उसमें सिर्फ आयात से मंगाई गई चीनी ही शामिल है. थोक उपभोक्ता इस चीनी को घरेलू बाजार से खरीदकर जमा नहीं कर सकेंगे. यही वजह है कि इस फैसला का घरेलू उपभोक्ताओं पर असर नहीं होगा.
सरकार के मुताबिक, चीनी की खुदरा कीमतें अगस्त के 65 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल से घटकर करीब 58.50 प्रति किलो हो गई हैं. इसका मतलब है कि खुदरा कीमतों में करीब 10% की गिरावट आई है. वहीं, चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 25% की गिरावट हो चुकी है. सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में हुई कमी का पूरा फायदा अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है. आने वाले समय में त्योहारों से पहले इसकी कीमतों में निश्चित रूप से गिरावट आएगी.
सरकार ने शुक्रवार को चीनी उत्पादक कंपनियों के संगठन ISMA, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज और चीनी कारोबारियों के साथ बैठक में व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स से अपील की कि एक्स-मिल कीमतों में कमी का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए, ताकि त्योहारों से पहले खुदरा ग्राहकों को सस्ती चीनी का लाभ मिल सके.
सरकार ने कहा कि चीनी नीति में किसान और उपभोक्ता दोनों को ध्यान में रखा गया है. नए चीनी सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी और गन्ना किसानों को 365 प्रति क्विंटल का बढ़ा हुआ Fair and Remunerative Price (FRP) मिलेगा. सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगी.



