आदिवासी विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त समन्वय से आयोजित इस भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय आदिवासी शिल्पकार परिवारों से सीधी चर्चा की। दल ने ढोकरा शिल्प तैयार करने की जटिल और पारंपरिक प्रक्रिया जैसे मोम से बारीक सांचे बनाना, मिट्टी का लेप चढ़ाना और फिर धातु ढलाई को बेहद नजदीक से देखा और समझा। इसके साथ ही टीम ने वन विभाग द्वारा कारीगरों के लिए तैयार किए गए सामुदायिक भवन में चल रही गतिविधियों का भी सूक्ष्म अवलोकन किया।
मंत्रालय की मंशा चिलकुटी को एक समग्र मॉडल प्रीमियम क्लस्टर के रूप में स्थापित करने की है। इसके तहत एक वर्षीय कार्ययोजना बनाकर एक ही एकीकृत परिसर में अत्याधुनिक ढोकरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, मटेरियल स्टोर और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग को आधुनिक बाजार के अनुरूप ढाला जाएगा। इस योजना के अंतर्गत बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन को एक सशक्त मार्केटिंग हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा सकेगा।



