सराफा बाजार में चांदी की कीमतें देखें तो पता चलता है कि 30 सितंबर के बाद से अब तक 30,000 रुपये यानी करीब 13 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. जिंस बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच चांदी पर दबाव बढ़ा है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज में जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों के अनुरूप घरेलू बाजार में सोने की कीमतें गिरकर जुलाई की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गईं.
चॉइस ब्रोकिंग की जिंस विश्लेषक पिंकी यादव का कहना है कि शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच पिछले एक महीने में चांदी करीब 14 फीसदी गिर गई है. निवेशक प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कीमती धातुओं में अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. उन्होंने कहा कि डॉलर में मजबूती, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई की लगातार बनी आशंकाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाकर करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है. इससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका बढ़ी है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों पर और दबाव पड़ा है.
ग्लोबल मार्केट में हाजिर सोने की कीमत गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई. हालांकि, बाद में इसमें सुधार हुआ और यह 4,024.37 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर कारोबार कर रहा था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की हाजिर कीमत 1.41 फीसदी गिरकर 53.83 डॉलर प्रति औंस रह गई. इसका मतलब है कि ग्लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है, जिसका असर घरेलू खुदरा बाजार पर भी पड़ा है.



