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अमेरिकी फेड ने नहीं बदलीं ब्याज दरें, भारतीय शेयर बाजार पर इस फैसले का क्या होगा असर

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अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने अक्टूबर में ब्याज दरों को 3.75% से 4% के दायरे में बरकरार रखने का फैसला किया है. 28 अक्टूबर को हुई बैठक में 10 अधिकारियों ने दरें स्थिर रखने का पक्ष रखा, जबकि दो अधिकारियों ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का समर्थन किया. सितंबर में दरों में बढ़ोतरी के बाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है और अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनी हुई है.

फेडरल रिजर्व ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के एनालिसिस में सुधार करते हुए इसकी ग्रोथ को मजबूत बताया है. हालांकि, महंगाई अभी भी सेंट्रल बैंक के 2% के टारगेट से काफी ऊपर है. सितंबर में अमेरिका की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 3.7% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 3.4% थी. एनर्जी की ऊंची कीमतें, आयात पर टैरिफ, उपभोक्ताओं का मजबूत खर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ता निवेश महंगाई की अहम वजहों में शामिल हैं. ऐसे में अब बाजार की नजर अब दिसंबर में होने वाली बैठक पर है, जहां ब्याज दरों को लेकर अगला फैसला लिया जा सकता है. अब निवेशकों के मन में भी ये सवाल है कि इससे भारतीय शेयर बाजार पर कितना असर हो सकता है.

भारत के बाजार पर क्या असर?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले का भारतीय शेयर बाजार पर खास असर पड़ने की संभावना बहुत अधिक नहीं है. फेड ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, इसलिए बाजार को ऐसा कोई बड़ा झटका नहीं लगा, जिससे निवेशकों की चिंता अचानक बढ़े. अब निवेशकों का ध्यान दूसरे अहम आर्थिक फैक्टर्स पर रहेगा.

फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों को लेकर अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आए. गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की प्रमुख बेथ हम्मैक ने मौजूदा दरों को बनाए रखने के फैसले का समर्थन नहीं किया. दोनों अधिकारियों ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का सुझाव दिया.

बेथ हम्मैक पहले भी महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की वकालत कर चुकी हैं. जुलाई में भी उन्होंने ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में अपना मत दिया था. सितंबर की बैठक में फेड ने सर्वसम्मति से दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी. उस समय 18 में से 16 अधिकारियों ने संकेत दिया था कि 2026 के अंत तक ब्याज दरों में कम से कम एक और बढ़ोतरी हो सकती है.

अमेरिका में महंगाई बढ़कर 3.7% पर पहुंची
अमेरिका में महंगाई का बढ़ना फेडरल रिजर्व के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. सितंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में मासिक आधार पर 0.6% की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त में यह वृद्धि 0.4% थी. सालाना आधार पर भी महंगाई 3.4% से बढ़कर 3.7% हो गई.

एनर्जी की कीमतों में तेजी और आयात पर लगाए गए टैरिफ से वस्तुओं की लागत बढ़ रही है. इसके अलावा, अमेरिकी उपभोक्ता खर्च कर रहे हैं और AI से जुड़े कारोबार में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है. इससे अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है, लेकिन बाजार में मांग बढ़ने के कारण महंगाई पर दबाव भी बना हुआ है.

मजबूत अर्थव्यवस्था के बीच फेड के सामने चुनौती
फेडरल रिजर्व ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गतिविधियां मजबूत रफ्तार से बढ़ रही हैं. AI से जुड़े निवेश को भी आर्थिक मजबूती का एक अहम कारण माना जा रहा है. फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के मुताबिक, इस निवेश से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और विकास को सहारा मिल रहा है.
हालांकि, सेंट्रल बैंक के सामने चुनौती यह है कि महंगाई को कम करने के साथ आर्थिक विकास को भी बनाए रखा जाए. ब्याज दरें बढ़ने से कर्ज लेना महंगा हो सकता है, जिसका असर घर खरीदने, कारोबार और उपभोक्ता खर्च पर पड़ सकता है.

दिसंबर में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि आगे की मौद्रिक नीति का फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा. केंद्रीय बैंक का लक्ष्य महंगाई को 2% तक लाना है. मौजूदा महंगाई दर इस लेवल से ऊपर है, इसलिए दिसंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना पर नजर बनी रहेगी.

फिलहाल दरों को स्थिर रखने का फैसला यह दिखाता है कि फेड आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. आने वाले दिनों में महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़े तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि केंद्रीय बैंक आगे दरें बढ़ाएगा या मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा.

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अक्टूबर में ब्याज दरों को लेकर क्या निर्णय लिया है?
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अक्टूबर में ब्याज दरों को 3.75% से 4% के दायरे में अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। इस बैठक में 10 अधिकारियों ने दरों को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया, जबकि दो अधिकारियों ने 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का समर्थन किया।

अमेरिका में बढ़ती महंगाई के पीछे कौन से प्रमुख कारण जिम्मेदार बताए गए हैं?
अमेरिका में सितंबर के दौरान खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.7% हो गई है, जो केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। इसके मुख्य कारणों में उच्च ऊर्जा कीमतें, आयात शुल्क, मजबूत उपभोक्ता खर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश शामिल हैं।

अमेरिकी फेड के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने से भारतीय शेयर बाजार पर किसी बड़े झटके की संभावना नहीं है, जिससे निवेशकों की घबराहट में अचानक वृद्धि नहीं हुई। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भारतीय बाजार में अस्थिरता को बनाए रख सकती हैं।