बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के बी.एस.सी. (कृषि) प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने ‘शहद के व्यावसायिक प्रसंस्करण’ से संबंधित पाठ्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण बिलासपुर के कानन पेंडारी स्थित शहद प्रसंस्करण केंद्र में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों को शहद के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग एवं विपणन (मार्केटिंग) की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराना था।
इस शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व डॉ. आर.के.एस. तोमर, प्रमुख वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष (कीट विज्ञान), ने किया, जिनके साथ डॉ. अर्चना केरकेट्टा, सह-प्राध्यापक एवं डॉ. यशपाल सिंह निराला, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान), भी उपस्थित रहे।
केंद्र में उपस्थित श्री लोकेश कोसमा, कार्यकारिणी अधिकारी, ने छात्रों को शहद प्रसंस्करण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जंगलों से प्राप्त कच्चे शहद को ग्रामीणों द्वारा एकत्र किया जाता है — विशेषकर कवर्धा एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों से — और फिर उसे उचित समर्थन मूल्य पर संग्रहित किया जाता है।
श्री कोसमा ने समझाया कि इस कच्चे शहद में प्राकृतिक रूप से नमी की अधिक मात्रा पाई जाती है, जिसे प्रसंस्करण प्रक्रिया द्वारा हटाकर उसे एक मानक गुणवत्ता स्तर पर लाया जाता है। इसके उपरांत शुद्ध शहद को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, और बाजार विपणन के लिए तैयार किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार यह प्रसंस्करण इकाई स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं के लिए आजीविका सृजन का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।
छात्रों ने प्रसंस्करण केंद्र में प्रयोग होने वाले तकनीकी उपकरणों, जैसे हनी डिह्यूमिडिफायर, फिल्ट्रेशन यूनिट, फिलिंग मशीन, और पैकेजिंग सेटअप को प्रत्यक्ष रूप से देखा तथा केंद्र की कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर स्थापित की जा सकने वाली लघु शहद प्रसंस्करण इकाइयों की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे ने बताया कि इस प्रकार के भ्रमण से छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है और वे ग्रामीण संसाधनों के माध्यम से कृषि आधारित उद्यमिता के अवसरों को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शहद जैसे प्राकृतिक उत्पादों के माध्यम से स्थानीय विकास एवं जैविक आजीविका को बढ़ावा दिया जा सकता है।
यह शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस अनुभव ने उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शहद उत्पादन एवं विपणन की बारीकियों को समझने का अवसर प्रदान किया और ग्रामीण संसाधनों के माध्यम से स्वरोजगार की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।




