गौरेला पेंड्रा मरवाही, 23 जुलाई 2025/ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के पर्यटन प्रबंधन विभाग द्वारा जीपीएम जिले की पर्यटन समितियों के लिए पर्यटक सुविधाकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के अवसर पर कुलपति प्रोफेसर व्योमकेश त्रिपाठी ने पर्यटन से स्थानीय समुदायों को होने वाले लाभ के बारे में बताया। उन्होंने जीपीएम प्रसाशन की पर्यटन को बढ़ावा देने की विभिन्न योजनाओं की सराहना की। प्रोफेसर व्योमकेश त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों को पंजीकरण किट प्रदान की तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामना दी। पर्यटन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर व्योमकेश त्रिपाठी, एफसीएम के डीन प्रोफेसर एस. के. बराल, जीपीएम डिस्ट्रिक्ट के पर्यटन नोडल ऑफिसर डॉ राहुल गौतम तथा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
डॉ प्रशांत कुमार सिंह ने जीपीएम कलेक्टर श्रीमती लीन कमलेश मंडावी का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इको पर्यटन एवं समुदाय आधारित पर्यटन ही पर्यटन इंडस्ट्री का भविष्य है। डॉ. सिंह ने समुदाय आधारित पर्यटन के संबंध में विस्तार से विभिन्न तथ्यों को प्रस्तुत किया। डॉ. सिंह ने अपने उदबोधन मे कहा की 21 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होने रहे प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभागियों को पर्यटकों के साथ व्यवहार, मार्गदर्शन, पर्यटन स्थलों की जानकारी, स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का प्रस्तुतीकरण, आपदा प्रबंधन, स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार, गाइड ट्रैनिंग आदि विषयों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा | इस दौरान प्रारंभिक 6 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण और अगला 6 दिवसीय फील्ड ट्रेनिंग के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा।
जीपीएम पर्यटन नोडल ऑफिसर डॉ राहुल गौतम ने जीपीएम जिले के पर्यटक स्थलों के बारे में विस्तार से बताया साथ ही उन पर्यटन स्थलों पर कार्यरत पर्यटन समितियों के द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों को भी समझाया । एफसीएम के डीन प्रोफेसर एस के बराल ने भारत में एवं पूरे विश्व में समुदाय आधारित पर्यटन के अवधारणा को बताया तथा वहाँ पर होने वाली समस्याओं तथा उनके निदान पर भी चर्चा की । कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के डॉ रोहित रविन्द्र बोर्लिकर, डॉ. जयप्रकाशनारायण तथा डॉ. केशव सिंह राठौर सहित विभाग के सभी छात्र छात्राएं इस अवसर पर उपस्थित रहें। पर्यटन प्रबंधन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अनिल कुमार टम्टा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।




