

शेयर बाजार में अस्थिरता का असर म्यूचुअल फंड में निवेश पर भी पड़ा है. फरवरी में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं के इनफ्लो में 26.17% की गिरावट देखी गई और कुल प्रवाह ₹29,303 करोड़ तक सिमट गया. लेकिन, खास बात यह है कि फोकस्ड फंड्स के इनफ्लो में फरवरी में 64.45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, फोकस्ड फंड्स में शुद्ध निवेश ₹1,287.72 करोड़ रहा, जो जनवरी में ₹783.07 करोड़ था. यानी लोगों ने इस फंड कैटेगरी में ज्यादा पैसा लगाया और बाजार उतार-चढाव के दौर में फोकस्ड फंडों पर विश्वास जताया है.
फोकस्ड फंड्स ऐसे इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं जो 20 से 30 चुनिंदा शेयरों में निवेश करते हैं, जबकि फ्लेक्सीकैप, लार्जकैप और मिडकैप फंड्स में 50-70 तक शेयर शामिल होते हैं. . निवेश की यह रणनीति उच्च-आत्मविश्वास वाले चयन (high-conviction picks) पर ध्यान केंद्रित करती है और फोकस्ड इनवेस्टमेंट के माध्यम से उच्चतम रिटर्न प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है. फरवरी में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 6% तक गिरे, जिससे स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप फंड्स में निवेश 35% तक घट गया. इसके बावजूद फोकस्ड फंड्स में निवेश बढ़ा है. बीते तीन महीनों में लार्जकैप फंड्स में 11% की वृद्धि हुई, जबकि फोकस्ड फंड्स में यह बढ़ोतरी 67% रही. हालांकि, बाजार में अस्थिरता के कारण मिडकैप फंड्स में निवेश 43% घटा और स्मॉलकैप फंड्स में 10% की कमी आई.
क्यों बढा निवेश
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ने मजबूत रिटर्न दिए. जिससे निवेशकों ने इन्हें प्राथमिकता दी. आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज ने बताया कि निवेशक आमतौर पर हालिया प्रदर्शन के आधार पर फैसले लेते हैं. इसलिए जब मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स बढिया रिटर्न दे रहे थे तो निवेशकों ने फोकस्ड फंड्स से पैसा निकालकर मिड और स्मॉलकैप फंड्स में लगाया. अब जब स्मॉलकैप और मिडकैप पिटे तो फोकस्ड फंड्स का रुख इनवेस्टर्स ने किया.