GIFT Nifty में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में 7 अक्टूबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. सुबह 8 बजे GIFT Nifty करीब 22,677 पर कारोबार कर रहा था, जो 97 अंक या 0.43% नीचे है. बाजार की नजर आज RBI की मौद्रिक नीति के फैसले पर भी है.
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही, जबकि अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए. MSCI Asia Pacific Index 0.4% गिरा. जापान के Topix और हांगकांग के Hang Seng में भी गिरावट रही. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ाई है. Brent क्रूड $101 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार 8वें सत्र में बिकवाल रहे. 6 अक्टूबर को FIIs ने ₹2,961 करोड़ की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की.
FD के ब्याज पर असर
आरबीआई रेपो रेट आज लाइव: सिद्धार्थ मौर्य, मैनेजिंग डायरेक्टर, विभावंगल अनुकूलकरा प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक, अगर RBI रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% करता है, तो कर्ज लेने वालों और बचत करने वालों पर अलग-अलग असर हो सकता है. फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है. ऐसे में लोगों को अपने बजट में बढ़ी हुई EMI का असर पहले से देख लेना चाहिए. अतिरिक्त पैसा उपलब्ध हो तो कुछ लोग लोन का आंशिक प्रीपेमेंट कर सकते हैं.
दूसरी ओर, रेपो रेट बढ़ने पर बैंक FD पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं. ऐसे में छोटी से मध्यम अवधि की FD पर ध्यान दिया जा सकता है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर और रुपये में कमजोरी के कारण महंगाई बढ़ने पर FD से मिलने वाला वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है. इसलिए सिर्फ ज्यादा ब्याज के लालच में FD चुनने से बचना चाहिए. नए निवेश से पहले कर्ज, लिक्विड फंड, इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस की समीक्षा करना भी जरूरी है.
प्रॉपर्टी सेगमेंट पर असर
आरबीआई एमपीसी अक्टूबर 2026 मीटिंग लाइव: हार्दिक शाह, डायरेक्टर, श्याम ग्रुप-धोलेरा SIR के मुताबिक, रेपो रेट बढ़कर 5.50% होने से रियल एस्टेट निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी और FD जैसे फिक्स्ड इनकम निवेश के बीच का समीकरण बदल सकता है. ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा होगा, जिसका असर उन प्रॉपर्टी सेगमेंट पर पड़ सकता है जो ब्याज दरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं.
कमर्शियल रियल एस्टेट और REITs के लिए भी फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है. हालांकि, लंबे समय के लीज कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाली नियमित आय इन पर कुछ दबाव कम कर सकती है. ऑफिस और रिटेल प्रॉपर्टी में निवेशक ज्यादा रिटर्न की मांग कर सकते हैं. कमजोर रुपया और ग्लोबल अनिश्चितता भी निवेश को प्रभावित कर सकती है. वहीं, अगर घरों की मांग बनी रहती है तो अफोर्डेबल और किराये के मकानों में असर सीमित रह सकता है. आगे बाजार पर सबसे ज्यादा निर्भर करेगा कि यह सिर्फ एक छोटी बढ़ोतरी है या लगातार ब्याज दरें बढ़ने की शुरुआत.



